हनुमान चालीसा Lyrics PDF in Hindi - Hanuman Chalisa

Hanuman Chalisa Lyrics PDF in Hindi Official Book for Mobile and Computer

नमस्कार दोस्तों, आप सभी श्रद्धालुओं के लिए हमने सभी कष्टों को हरने वाले, हनुमान जी का चालीसा का एक इबुक लाएं हैं। हनुमान चालीसा का पाठ करना हमारे हिंदू धर्म में सबसे ज्यादा लाभकारी पाठ माना जाता है। लेकिन दोस्तों हर एक जगह हनुमान चालीसा का किताब एक मुस्किल काम होता है क्योंकि हम हनुमान चालीसा को किसी दूसरे किताब की तरह नहीं रख सकते हैं।
इस समय को दूर करने के लिए हमने यह हनुमान चालीसा का पीडीएफ (Hanuman Chalisa Lyrics PDF in Hindi) आपके लिए लाया है। यह पीडीएफ हिंदी भाषा में और देवनागरी लिपीए लिखी गई है। आप हनुमान चालीसा के इस पीडीएफ फाइल (Hanuman Chalisa PDF) को अपने मोबाइल या लैपटॉप में डाउनलोड कर कहीं भी ले जा सकते हैं। और जब दिल करे आप हनुमान जी का सुमिरन कर सकते हैं।

Hanuman chalisa lyrics pdf in Hindi

हनुमान चालीसा पीडीएफ (Hanuman Chalisa Lyrics PDF)

दोस्तों यह पीडीएफ बुक हनुमान चालीसा का एकदम हुबहू कॉपी है। इसमें आपको चौपाई के साथ साथ उसकी व्याख्या भी दिया गया है। आप इस pdf को नीचे दिए गए लिंक से डाऊनलोड कर सकते हैं। यह बिल्कुल ऑफिशियल हनुमान चालीसा पीडीएफ है तो इसलिए आप चिंतामुक्त होकर इसे डाउनलोड कर सकते हैं। यह लिंक पहले से ही इंटरनेट पर मौजूद था। इस हमने खोजकर आपके साथ साझा किया है।



हमारे Hanuman Chalisa Pdf की विशेषताएं

  • यह किताब हनुमान चालीसा के चौपाइयों का अर्थात् lyrics का सहज भाषा में व्याख्या किया गया है जिसे कोई भी पढ़ कर आसानी से समझ सकता है।
  • यह pdf पूरी तरह से स्कैन किया गया है इसमें किसी भी प्रकार कमी नहीं है।
  • यह pdf आपको हमारे वेबसाइट पर बिल्कुल मुफ्त में उपलब्ध है, आप इसे डाउनलोड करके इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • इसमें हिंदी ले साथ इंग्लिश में भी वर्णन किया गया है।
  • इसमें चालीसा के साथ साथ बजरंग बली की आरती और हनुमान बान भी दिया गया है।

हनुमान चालीसा लिरिक्स (Hanuman Chalisa Lyrics Hindi)


दोहा

श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि ।
बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि ॥

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार ।
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार ॥

चौपाई

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर ।
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥1॥

राम दूत अतुलित बल धामा ।
अञ्जनि-पुत्र पवनसुत नामा ॥2॥

महाबीर बिक्रम बजरङ्गी ।
कुमति निवार सुमति के सङ्गी ॥3॥

कञ्चन बरन बिराज सुबेसा ।
कानन कुण्डल कुञ्चित केसा ॥4॥

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै ।
काँधे मूँज जनेउ साजै ॥5॥

सङ्कर सुवन केसरीनन्दन ।
तेज प्रताप महा जग बन्दन ॥6॥

बिद्यावान गुनी अति चातुर ।
राम काज करिबे को आतुर ॥7॥

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया ।
राम लखन सीता मन बसिया ॥8॥

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा ।
बिकट रूप धरि लङ्क जरावा ॥9॥

भीम रूप धरि असुर सँहारे ।
रामचन्द्र के काज सँवारे ॥10॥

लाय सञ्जीवन लखन जियाये ।
श्रीरघुबीर हरषि उर लाये ॥11॥

रघुपति कीह्नी बहुत बड़ाई ।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ॥12॥

सहस बदन तुह्मारो जस गावैं ।
अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं ॥13॥

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा ।
नारद सारद सहित अहीसा ॥14॥

जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते ।
कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते ॥15॥

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीह्ना ।
राम मिलाय राज पद दीह्ना ॥16॥

तुह्मरो मन्त्र बिभीषन माना ।
लङ्केस्वर भए सब जग जाना ॥17॥

जुग सहस्र जोजन पर भानु ।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू ॥18॥

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं ।
जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं ॥19॥

दुर्गम काज जगत के जेते ।
सुगम अनुग्रह तुह्मरे तेते ॥20॥

राम दुआरे तुम रखवारे ।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे ॥21॥

सब सुख लहै तुह्मारी सरना ।
तुम रच्छक काहू को डर ना ॥22॥

आपन तेज सह्मारो आपै ।
तीनों लोक हाँक तें काँपै ॥23॥

भूत पिसाच निकट नहिं आवै ।
महाबीर जब नाम सुनावै ॥24॥

नासै रोग हरै सब पीरा ।
जपत निरन्तर हनुमत बीरा ॥25॥

सङ्कट तें हनुमान छुड़ावै ।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै ॥26॥

सब पर राम तपस्वी राजा ।
तिन के काज सकल तुम साजा ॥27॥

और मनोरथ जो कोई लावै ।
सोई अमित जीवन फल पावै ॥28॥

चारों जुग परताप तुह्मारा ।
है परसिद्ध जगत उजियारा ॥29॥

साधु सन्त के तुम रखवारे ।
असुर निकन्दन राम दुलारे ॥30॥

अष्टसिद्धि नौ निधि के दाता ।
अस बर दीन जानकी माता ॥31॥

राम रसायन तुह्मरे पासा ।
सदा रहो रघुपति के दासा ॥32॥

तुह्मरे भजन राम को पावै ।
जनम जनम के दुख बिसरावै ॥33॥

अन्त काल रघुबर पुर जाई ।
जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई ॥34॥

और देवता चित्त न धरई ।
हनुमत सेइ सर्ब सुख करई ॥35॥

सङ्कट कटै मिटै सब पीरा ।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ॥36॥

जय जय जय हनुमान गोसाईं ।
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं ॥37॥

जो सत बार पाठ कर कोई ।
छूटहि बन्दि महा सुख होई ॥38॥

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा ।
होय सिद्धि साखी गौरीसा ॥39॥

तुलसीदास सदा हरि चेरा ।
कीजै नाथ हृदय महँ डेरा ॥40॥

॥दोहा॥

पवनतनय सङ्कट हरन, मङ्गल मूरति रूप ।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप ॥


मंगलवार को हनुमान जी का दिन माना जाता है इसलिए आपको हर मंगलवार को हनुमान चालीसा का पाठ जरूर करना चाहिए। और अगर आपको शनि या राहु-केतु से परेशानी है तो आपको शनिवार को भी हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए। इससे आपके ऊपर से शनि का बुरा प्रभाव खत्म हो जाएगा।

और अंत में आपसे यह निवेदन है कि कृपया यह लेख अपने दोस्तो के साथ भी शेयर करें। धन्यवाद।
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